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Friday, 7 July 2017

भारत सरकार को NDTV जैसे देश से गद्दारी करने वाले चैनल को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए। सरकार का ये फैसला सही होगा या नहीं ? -

नई दिल्लीः सोमवार को एनडीटीवी के यहां की गई छापेमारी पर आज (मंगलवार को) सीबीआई ने कहा कि छापे सिर्फ एनडीटीवी के प्रमोटर्स और उनके दफ्तर पर मारे गए है. सीबीआई ने साफ किया कि छापे की कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर हुई. सीबीआई ने बताया कि कोर्ट से सर्च वारंट के बाद ही इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया. जांच एजेंसी से साफ किया कि उन्होंने एनडीटीवी के दफ्तर, स्टूडियों और न्यूजरूम में छापा नहीं मारा है. एजेंसी ने साफ किया वो प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करते है. आपको बता दें कि सीबीआई ने सोमवार को प्रणव रॉय, राधिका रॉय और आरआरपीआर कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था और उनके यहां पर छापेमारी की थी. ये मामला गलत तरीके से लोन लेकर बैंक को चूना लगाने के आरोप में दर्ज किया था. एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय के घर सीबीआई का छापा सोमवार को सीबीआई ने रॉय के घर सहित दिल्ली में दो परिसरों और देहरादून एवं मसूरी में एक-एक परिसर में छापेमारी की. एजेंसी के सूत्रों के अनुसार देहरादून और मसूरी की संपत्तियों पर भी रॉय का स्वामित्व है. 


सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक एवं एनडीटीवी के एक शेयरधारक संजय दत्त की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की जिसमें रॉय, उनकी पत्नी राधिका रॉय, एनडीटीवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और आईसीआईसीआई बैंक के अज्ञात अधिकारियों के नाम शामिल हैं. सीबीआई छापे पर एनडीटीवी ने प्रेस आवाज दबाने का आरोप लगाया था एनडीटीवी ने एक बयान में कहा कि सत्तारूढ़ दल के नेता एनडीटीवी टीम की ‘स्वतंत्रता एवं निडरता’ को ‘पचा’ नहीं पाए. इसमें कहा गया, ‘सीबीआई की छापेमारी कुछ और नहीं बल्कि मीडिया की आवाज को दबाने की एक और कोशिश है.’ चैनल ने कहा कि यह साफ है कि सीबीआई की छापेमारी ‘प्रतिशोध की कार्रवाई’ है क्योंकि जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज प्रोमोटरों एवं एनडीटीवी के कारोबार से संबंधित नहीं हैं. एनडीटीवी के बयान में पूर्व कर्मचारी की पहचान संजय दत्त के रूप में की गयी है. उसमें कहा गया है कि यह व्यक्ति चैनल से असंतुष्ट उसी का एक पूर्व कंसल्टेंट संजय दत्त है जो झूठे आरोप लगाता रहा है और उनके आधार पर अदालतों में मुकदमे दायर करता रहा है लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी अदालत से कोई भी आदेश लाने में नाकाम रहा है. चैनल ने कहा कि यह तथ्य स्पष्ट है कि सीबीआई के छापे स्वतंत्र मीडिया को जानबूझकर निशाना बनाने की कोशिश है. सीबीआई का दावा सीबीआई के मुताबिक आरआरपीआर होल्डिंग्स ने जनता से एनडीटीवी के 20 प्रतिशत शेयर खरीदने के लिए इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड से कथित तौर पर 500 करोड़ रुपए का ऋण लिया था. सीबीआई का आरोप है कि आरआरपीआर होल्डिंग्स ने इंडिया बुल्स का उधार चुकाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से 19 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से 375 करोड़ रूपए का रिण लिया था.

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