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Monday, 8 May 2017

केजरीवाल जैसे लोगों के कारण ही कहा जाता है की, "राजनीती एक गन्दा दलदल है"

लोगों ने 2011 के बाद कितनी उम्मीद की थी, 1947 के बाद से ही नेताओं के घोटाले देखे, चोरी ठगी देखि
राजनीती के बारे में कहा जाने लगा की, "राजनीती गंदे लोगों का दलदल है"

नेताओं को सब ठग समझने लगे थे, नेताओं की छवि ख़राब थी
जब अन्ना आंदोलन शुरू हुआ तो लोगों को लगा की अब कुछ होगा, केजरीवाल ने नयी राजनितिक पार्टी बनाई, पारदर्शिता, स्वच्छ राजनीती, ईमानदारी की बात की
तो लोगों ने बड़े मन से केजरीवाल किया और केजरीवाल को दिल्ली का मुख्यमंत्री भी बनाया

55% वोट केजरीवाल को मिला, 70 में से 67 सीट जनता ने केजरीवाल को दी, लोगों को उम्मीद थी की
अब कोई अच्छा नेता आया है, पर जैसे जैसे दिन  बीतने लगे केजरीवाल और उसके गुर्गों का असली चेहरा भी सामने आने लगा

फर्जी डिग्री, महिला कार्यकर्तों की आत्महत्या, राशन कार्ड के नाम पर महिलाओं का शोषण, जमीनों पर कज्बा
जनता यही सब देखती गयी और धीरे धीरे जनता दुखी होने लगी
केजरीवाल ने जो भी वादे किये चाहे CCTV हो, WIFI हो, महिला सुरक्षा का मुद्दा हो, बिजली कंपनियों का ऑडिट हो, अस्पताल हो, कॉलेज हो, 500 नए स्कुल हो


जनता को कुछ नहीं मिला, एक भी विकासकार्य केजरीवाल ने मन से किया हो, 1 भी नहीं

पर जनता को केजरीवाल के बहुत से रंग देखने को मिले, केजरीवाल के परिवार की महंगे जगहों पर छुट्टियां,
केजरीवाल का महंगे अस्पताल में निजी इलाज, 4 करोड़ का वकील, डेढ़ करोड़ का समोसा चटनी
16 हज़ार रुपए की खाने की 1 थाली, और आज केजरीवाल पर खुलासा हो गया की
ये अपने मुख्यमंत्री आवास पर लूट के करोडो रुपए कैश में भी लेता है

सच में जनता का भरोसा केजरीवाल जैसे लोगों के राजनीती में आने के बाद ही टूटता यही
केजरीवाल जैसे लोगों के कारण उन नेताओं को भी जनता शक की नजर से ही देखती है जो बिचारे असल में ईमानदार हो
जनता का भरोसा, जनता की उम्मीदों को केजरीवाल जैसे लोग तोड़ते है, केजरीवाल जैसे लोग सच में नीच होते है