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Friday, 12 May 2017

कश्मीर के बच्चों को पढ़ने दो, उन्हें पत्थरबाजी करने को मत उकसाओ : शहनाज

नई दिल्ली :  कश्मीर मुद्दा आज देश के लिये एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। वहां लगातार कुछ न कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं होती आ रही हैं जोकि न तो देश के हित में है न हीं कश्मीर की जनता के हित में। और कश्मीर के अलगाववादी नेता वहां के जनता और स्कुल के छात्रों को ऐसे कृत्य करने को उकसा रहे हैं। कश्मीर के छात्रों को स्कुल जाने से रोककर पत्थर फेंकने को उकसा रहे हैं। कश्मीर की जनता को गलत संदेश देकर भ्रमित कर रहे हैं। कश्मीर को प्रगति से दुर ले जा  रहे हैं।

इस पर चिंतन की आवश्यता है। क्यूं ये अलगाववादी नेता अपने बच्चों को  तो विदेश भेज देते हैं पढ़ाई के लिये और कश्मीर के बच्चों को पत्थरबाजी करने के लिये उकसाते हैं। आखिर कश्मीर में ये अलगाववादी नेता खुलेआम कैसे वहां की आम जनता को पत्थर फेंकने को उकसा रहे हैं। आखिर क्यूं ये बेशर्म नेता रहते और खाते तो हिंदुस्तान में हैं परन्तु गाते पाकिस्तान की हैं। आखिर क्यूं भारत सरकार इनके खिलाफ कोई प्रतयक्ष कारवाई नहीं कर पा रही है। और कश्मीर मुद्दे का कोई स्थायी हल कब निकाला जायेगा।


हाल हीं में जी न्यूज पर चल रहे एक वाद-विवाद के दौरान कश्मीर की दो छात्रा शहनाज और मिस्बाह, जो की इसी वर्ष आईआईटी की परीक्षा को को क्वालिफाई की है, ने कहा कि- हमें स्कुलों में सिखाया जाता है कि हमें बस पढ़ाई पर ध्यान देना है धर्म से हमें कोई मतलब नहीं है। कश्मीर में तो हिंदू बच्चे ईद मनाने में हमारी मदद करता हैं और हमारे साथ वो भी ईद मनाते हैं।

शहनाज ने आगे कहा कि पत्थर उठा लेने से कोई हल नहीं निकलता है। वहां के बच्चों को समझाना चाहिये कि पढ़ाई जरूरी है तभी वे ये भी समझ पायेंगे कि पत्थर उठा लेना गलत है। कश्मीर हमेशा से हीं इन सबमें हीं उलझा आ रहा है। हमें शिक्षा मिलनी चाहिये जोकि पूरी तरह से नहीं मिल पा रही है। 12 महीनों का एक साल होता है जिसमें कि 8 से 9 महीने कश्मीर बंद हीं रहता है। तो चार महीनों मे कैसे हम अपनी कोर्श पूरा कर सकते है। परन्तु हमने मेहनत की है। हमें आर्मी का सहयोग मिला, सुपर-30 प्रोजेक्ट का सहयोग मिला और आज कश्मीर के लिये एक मिशाल बन गयी और अब हम कश्मीर जाकर ये बता सकते हैं कि ये पत्थरबाजी हमें नहीं करनी चाहिये, ये गलत है।

आखिर शहनाज का कहना बिल्कुल ठीक है। जिन परिस्थितियों के बीच से आज ये लड़की इस मुकाम तक पहुंची है ये उसी परिस्थितियों को बता रही है कि क्या हालात है कश्मीर की क्या हाल कर रखा है वहां के अलगाववादी नेताओं ने।