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Tuesday, 21 February 2017

महत्वपूर्ण सर्वे: क्या स्कूलों में रामायण और महाभारत के अध्याय को स्थायी रूप से पढ़ाया जाना चाहिए ?

महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों को धार्मिक किताब की तरह नहीं, बल्कि साहित्य की तरह पढ़ाया जाना चाहिए।
‘शेक्सपियर पढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन साथ में संस्कृत के कवियों और कालिदास जैसे लेखकों की रचनाओं को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए। दुनिया के किसी भी अन्य महान लेखक की तुलना में कालिदास किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं थे।’ उन्होंने कहा कि कालिदास को स्कूली पाठ्यक्रम से बाहर रखकर हम नई पीढ़ी को उनकी संस्कृति और मौलिक पहचान के बड़े हिस्से से दूर रख रहे हैं।

इस देश का कट्टरपंथी तबका इतिहास की गलत व्याख्या कर प्राचीन भारत की उपलब्धियों को नकारने की कोशिश कर रहा है। ‘ऐतिहासिक रूप से ही भारत इंजिनियरिंग और चिकित्सा के क्षेत्र में काफी आगे रहा है। आयुर्वेद और गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट का योगदान इन क्षेत्रों में भारत की प्राचीन कौशल व निपुणता का ऐसा उदाहरण है जिसके दस्तावेज आज भी सुरक्षित हैं।’
तो क्या आपको नही लगता की स्कूलों में रामायण और महाभारत के अध्याय पढ़ाने चाहिए अगर आप भी इस बात से सहमत है तो हमे जरूर बताये

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