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Sunday, 26 February 2017

कंपनियों से 1000 रुपए से ज्‍यादा के गि‍फ्ट नहीं ले पाएंगे डॉक्‍टर, सरकार ला रही नया रूल

नई दिल्ली. अपनी दवाइयों की बिक्री बढ़ाने के लिए फार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को गिफ्ट देने पर सरकार रोक लगाने जा रही है। सरकार गिफ्ट की कीमत मैक्सिमम 1000 रुपए तय कर सकती है। वहीं, ड्रग कंपनियों द्वारा डॉक्टरों के फॉरेन टूर ऑर्गनाइज करने पर भी रोक लगेगी। दरअसल, सरकार फार्मा कंपनियों-डॉक्टरों की मिली-भगत रोकने के लिए फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस के लिए नए सिरे से कोड ऑफ कंडक्ट लाने की तैयारी में है। कोड तोड़ने पर फॉर्मा कंपनियों के साथ डॉक्टरों पर पेनल्टी भी तय की जाएगी। इन पर लागू होगा यूनिफॉर्म कोड....



- डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिफॉर्म कोड डिपार्टमेंट ऑफ फॉर्मास्युटिकल, ड्रग कंट्रोलर और नेशनल व स्टेट मेडिकल काउंसिल ने तैयार किया है।
- ये डॉक्टरों, दवा कंपनियों के साथ केमिस्ट, होलसेलर्स और डीलर पर भी लागू होगा। अगर कोड ऑफ कंडक्ट तोड़ा गया तो इन पर पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसके अलावा सजा भी दी जा सकती है। एमसीआई या स्टेट काउंसिल से डॉक्टरों के नाम रिमूव किए जा सकते हैं या उनके लाइसेंस कैंसल किए जा सकते हैं।

रेवेन्यू का 5% गिफ्ट पर खर्च करती हैं कंपनियां
- सरकार ने बजट में इस बात का एलान किया था कि लोगों को सस्ती और अच्छी क्वालिटी दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- दिक्कत यह है कि बहुत से डॉक्टर जेनेरिक की जगह ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर डॉक्टर द्वारा ब्रांडेड दवाइयां लिखने की वजह से ड्रग कंपनियां अपनी दवाइयों को प्रमोट करने के लिए डॉक्टरों पर खर्च करती हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक,  फार्मा कंपनियां टोटल रेवेन्यू का 5% हिस्सा डॉक्टरों की गिफ्ट पर खर्च करती हैं। डॉक्टर सस्ती दवा की बजाए, उन कंपनियों की महंगी दवा लिखते हैं।

गिफ्ट पॉलिसी से बढ़ जाते हैं दवाओं के दाम
- बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड प्रमोशन के लिए लाखों रुपए डॉक्टरों पर खर्च कर देती हैं। कुछ कंपनियां अपने टोटल रेवेन्यू का 20 फीसदी तक प्रमोशन में खर्च करती हैं।
- प्रमोशन पर किया जाने वाला यह खर्च सीधे तौर पर दवा के दाम में जोड़ दिया जाता है।  

कोड ऑफ कंडक्ट के लिए किस तरह के प्रपोजल
- डॉक्टर किसी फॉर्मा कंपनी के रिसर्च प्रोग्राम में भाग लेते हैं तो कंपनी को इस पर हुए खर्च को पब्लिक करना होगा।
- फॉर्मा कंपनी के किसी इवेंट में डॉक्टरों के लेक्चर, कंसल्टिंग या ट्रैवल पर कितना खर्च हुआ, इसकी जानकारी देनी होगी। जो कंपनियां सरकारी खरीद के लिए बिड करेंगी, उन्हें जेनेरिक नाम से दवाइयां देनी होंगी।

गिफ्ट की वैल्यू के हिसाब से डॉक्टरों को पनिशमेंट
- डॉक्टरों की रेग्युलेटरी बॉडी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी पनिशमेंट के लिए 2016 में सरकार को सुझाव दिए थे। इसमें पहली बार गिफ्ट लेकर दवा प्रमोट करने वाले डॉक्टरों पर पनिशमेंट तय किया गया है। गाइडलाइन के अनुसार अगर कोई डॉक्‍टर गिफ्ट लेता है तो उसे गिफ्ट की वैल्यू के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

-1000 रुपए से 5000 रुपए तक के गिफ्ट पर डॉक्टरों को सेंसर किया जाना।
-5000 रुपए से 10 हजार रुपए तक के गिफ्ट लेने पर इतना ही जुर्माना और नेशनल या स्टेट काउंसिल रजिस्टर से 3 माह का तक रिमूवल।
-10 हजार रुपए से 50 हजार रुपए तक के गिफ्ट पर इतना ही जुर्माना और 6 माह का रिमूवल।
-50 हजार से 1 लाख रुपए पर इतना ही जुर्माना और 1 साल का रिमूवल।
-1 लाख रुपए से ज्यादा का गिफ्ट लेने पर कैश के बराबर जुर्माना और 1 साल से ज्यादा रिमूवल।

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