loading...
Loading...

Thursday, 19 January 2017

भारत का चीन को मुंहतोड़ जवाब, ‘ भीख में नहीं चाहिए एनएसजी सदस्यता’


एनएसजी की सदस्यता हमें गिफ्ट में नहीं चाहिए

दरअसल, भारत ने चीन के तंज के जवाब में ये बात कही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार को कहा कि हमारी दावेदारी हमारे परमाणु अप्रसार के शानदार रिकॉर्ड पर आधारित है। किसी के गिफ्ट की मोहताज नहीं है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा जाते-जाते किसी को ‘विदाई गिफ्ट’ के तौर पर एनएसजी सदस्यता नहीं दे सकते। इससे पहले ओबामा प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि एनएसजी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी की राह में चीन ‘रोड़ा’ है। 
अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा का कार्यकाल पूरा होने वाला है। इससे पहले ओबामा प्रशासन ने कोशिश की थी कि भारत को इसमें प्रवेश मिल सके। अमेरिकी दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों की सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिसवाल ने भी कहा कि एनएसजी में भारत की सदस्यता में रोड़े अटकाने वाला एकमात्र चीन है।
चीन नहीं चाहता कि भारत एनएसजी का सदस्य बने
बिसवाल के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा था, ‘एनएसजी की सदस्यता दोनों देशों के लिए फेयरवेल गिफ्ट जैसा नहीं है जिसका आपस में लेन-देन कर लें और नॉन-एनपीटी देशों की इस ग्रुप में प्रवेश को लेकर चीन अपने बयान पर कायम है।‘ चीन के अनुसार बिना परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर किए किसी भी देश की इस समूह में प्रवेश नहीं मिल सकता है। चीन का कहना है कि भारत के आवेदन के बारे में सोचने से पहले चीन को नॉन-एनपीटी देशों के बारे में एक सामान्य रवैया अपनाना होगा।
चीन नहीं चाहता कि भारत एनएसजी का सदस्य बने। एनएसजी के ज्यादातर सदस्यों के समर्थन के बावजूद चीन भारत की दावेदारी को इस आधार पर लटका चुका है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किया है। इसके अलावा चीन एनएसजी सदस्यता के लिए पाकिस्तान का खुलकर समर्थन कर रहा है। पाकिस्तान ने भी एनएसजी सदस्यता के लिए आवेदन कर रखा है और उसने भी एनपीटी पर दस्तखत नहीं किया है। 

No comments: