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Friday, 20 January 2017

गौरवाम्ववित और हैरान कर देने वाला सच : रामायण काल के पत्थर आज भी मौजूद है इस समुद्र में ! शेयर करे

आज भी मौजूद है वो पत्थर जो रामायण काल में रामसेतु का निर्माण करने के लिए लगाये गए थे। हम जानते ही हैं वानर प्रजाति की वो सेना बलशाली और इंजीयनरिंग में माहिर थी। इतनी बलशाली कि बाली ने अपनी खांक में दबाकर रावण को चक्कर खिलाये थे । साथ में थे महान इंजिनियर नल नील ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें ऐसे पत्थर के निर्माण की विधि पता थी जो पानी में डूबते नहीं है ।

रामायण काल में रामेश्वरम से लंका जाने के लिए वानर सेना ने एक पुल बनाया था । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यह माना है कि ये पत्थर आज भी मौजूद है और इन्ही पत्थरों के सहारे धनुषकोटि से रामेश्वरम तक समुन्द्र में बना रेल पुल खड़ा है । उन्होंने अपनी सॅटॅलाइट तस्वीरों से इस बात की पुष्टि भी की है । भारत में प्राचीन विज्ञान कितना महान था इसकी पुष्टि केवल इसी बात से हो जाती है ।

ग़ौरतलब है कि इस रेलवे पुल के चारों ओर लगभग 10×10 आकार के पत्थर मौजूद है और ये पत्थर रेलवे लाइन के साथ बिछाये हुए है । ये पत्थर समुद्र में इतने गहरे है जमे हुए है कि इनका एलाइनमेंट एक इंच भी इधर उधर नहीं हो सकता है । साथ में ये भी कहा जाता है कि इस समुन्द्र की लहरों के कारण बड़े-बड़े जहाज तहस नहस हो जाते है लेकिन समुद्र की बड़ी से बड़ी लहर और चक्रवात भी इन पत्थरों का बाल भी बांका नहीं कर सकें ।
दुःख बात ये है कि हमारे देश के सेक्युलर नेताओं ने इस पुल से जुड़ीं इस जानकारी को आजतक नहीं बताया । कांग्रेस ने तो सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि “राम तो कभी थे ही नहीं”। इन्होने ने तो इतनी नीचता की थी कि प्रभु राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था ।

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