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Monday, 23 January 2017

तस्लीमा नसरीन ने कहा- यूनिफाेर्म सिविल कोड तुरंत लागू हो, मुस्लिमो ने दी जान से मरने की धमकी

बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की पैरवी की है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आई तस्लीमा ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड देश में तुरंत प्रभाव से लागू होना चाहिए। उन्होंने बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर आरोप भी लगाया कि उनके खिलाफ गलत फतवा जारी करने वाले उनके दोस्त हैं। ये कहा तस्लीमा ने…
– तस्लीमा ने कहा कि मुझे फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन में भरोसा है।
जब मैं बौद्ध , हिंदुत्व का विरोध करती हूं तो कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन जब इस्लाम को क्रिटिसाइज करती हूं तो मुझे मारने की धमकी मिलती है।
– मुझे मारने के लिए गैर कानूनी फतवा दिया जाता है।
– जिसने फतवा दिया वो बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का दोस्त है। तो फिर देश में सेक्युलरिज्म कहां है।
– क्या सेकुलरिज्म का मतलब फतवा जारी करने वालों की पैरवी करना या उन्हें बचाना ही है।
– बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को पूरे अधिकार नहीं मिलते हैं। लेकिन हिंदुस्तान में हिंदू महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया गया है।
– फिर भारत में मुस्लिम महिलाओं को बराबर का हक नहीं दिया जा रहा। वे उनके लिए डेमोक्रेसी की बात क्यों नहीं करते।
– इस्लाम को माननेवाले और इस्लामिक देश जब तक खुद के लिए आलोचना नहीं सुनेंगे, तब तक वे धर्मनिर्पेक्ष नहीं हो सकते।
हर धर्म महिलाओं के खिलाफ
– तस्लीमा ने कहा, धर्म कोई सा भी हो, महिलाओं के खिलाफ ही होता है। उनके अधिकार की बात नहीं करता।
– तस्लीमा ने कहा, सेक्युलर लेखकों का मर्डर नहीं होना चाहिए।
– बदलाव के लिए शिक्षा का साथ लेना होगा। शिक्षा से ही चीजें बदल सकती हैं।
– तस्लीमा ने कहा, इनटॉलरेंस हर सैक्टर में है। चाहे वह घरेलू हिंसा हो या महिलाओं पर अत्याचार।
– मैं राष्ट्रवाद में भरोसा नहीं करती। बल्कि वन वर्ल्ड और वन पासपोर्ट में भरोसा करती हूं।
फेस्टिवल परिसर के बाहर विरोध
– जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में आई तस्लीमा का विरोध भी हुआ।
– जब वे डिग्गी पैलेस के फ्रंट लॉन में अपनी बात रख रही थीं, उसके कुछ मिनट बाद ही कुछ मुस्लिमों ने बाहर विरोध किया।
– उनके विरोध को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।
– विरोध में उन्होंने कहा कि ऐसी विवादित लेखिका को साहित्य उत्सव में बुलाने की आवश्यकता क्या थी।
– इसी तरह के विरोध की आशंका को देखते हुए आयोजकों ने अंत तक तस्लीमा के सेशन को छिपाए रखा। अचानक एक सेशन में उन्हें मंच पर चढ़ा दिया गया। मंच तक पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया था।

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